आजकल प्रायः शादी विवाह लगने के पहले वर-वधु या लड़के लड़की की Kundli का मिलान किया जाता है, और इस मिलान के बाद ही तय होता है की लड़का और लड़की की कुंडली विवाह के उपयुक्त है या नहीं

क्यूंकि Kundli Milan कर आप यह भी देख सकते हैं, कि आपके होने वाले जीवनसाथी के साथ आपका कैसा तालमेल रहेगा।

एक सफल गृहस्थ जीवन के लिए लड़के और लड़की के बीच गुणों का मिलना बहुत जरुरी होता है, ये शादी के समय मिलायी जाती है ,

Kundli Milan को अधिकतर लोग एक सरसरी निगाह से देखते हैं. उनकी नजर में जितने अधिक गुण मिलते हैं उतने अच्छा होता है, जबकि यह बिलकुल गलत है. कई बार 36 में से 36 गुण मिलने पर भी वैवाहिक सुख का अभाव रहता है.

और अगर ३१ से ३६ के मध्य गुण मिले हो तो उनका मिलाप अति उत्तम होता है। और गुण अगर २१ से ३० के मध्य मिले हो तो वर और कन्या का मिलाप बहुत अच्छा होता है। गुण अगर १७ से २० के मध्य में हो तो वर और कन्या का मिलाप साधारण होता है और गुण अगर ० से १६ के मध्य में हो तो इसे अशुभ माना जाता है।

लेकिन इसके लिए Gun Milan तो हो गया लेकिन Janam Kundli का आंकलन नहीं हुआ |

क्यूंकि Vedic Astrology ग्रह, Yog, नक्षत्र, Rashi आदि के आधार पर यह निश्चय करता है, कि अमुक राशि, Nakshatr, योग वाले व्यक्ति का अमुक राशि, नक्षत्र, योग वाली कन्या से वैवाहिक संबंध कैसा रहेगा? दोनों पक्षकारों का पारस्परिक स्वभाव, प्रेम, आचार-व्यवहार कैसा रहेगा?

क्योकि समान आचार-व्यवहार वाले वर-कन्या होने पर ही दाम्पत्य जीवन सुखमय हो सकता है। या नहीं तब उसे आगे बढ़ना चाहिए।

शादी के लिए Kundli मिलाते समय मुख्य रूप से Ashtkuto का मिलान किया जाता है।

ये अष्टकूट है, वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रहमैत्री,गण, राशि, Naadi। Kundli मिलाते समय कन्या और वर की कुण्डली में इन आठों बातों का विषेश रूप से विचार किया जाता है।

वर्ण का १, वश्य के २, Tara के ३, योनि के ४, ग्रहमैत्री के ५, गण के ६, Bhakut के ७, तथा नाड़ी के ८ गुण उत्तरोत्तर वृद्धि से ग्रहण किये जाते हैं।

इस प्रकार इन सभी गुणों योग ३६ होता है। इनमें अंतिम के तीन गुण सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि इनके कुल गुण मिलकर सभी 8 कूट में सबसे ज्यादा (21= नाड़ी-8 भकूत-7 गण-6) और सभी गुणों का 58 प्रतिशत होते हैं।

यही कारण है कि Kundli Milan में इन तीन को 'Mahadosh' कहा गया है।

नाड़ी दोष - 

Nadi Dosh इससे दोनों के बीच अनुवांशिक अनुकूलता का पता चलता है. नाड़ी तीन प्रकार की होती है | आदि, मध्य और अंत | इन्हें वात, पित्त और कफ भी कहते हैं | और कहते है की अगर ‘आदि दोष’ बन रहा हो तो दोनों का तलाक निश्चित है।‘मध्य दोष’ बन रहा हो तो दोनों की ही मृत्यु हो सकती है।और ‘अन्य दोष’ बन रहा हो तो दोनों का वैवाहिक जीवन बेहद कष्टकर गुजरता है या दोनों में किसी एक की मृत्यु हो जाती है और उनका वो एकाकी जीवन भी सामान्य से अधिक कष्टदायक होता है।

Vedic Astrology के अनुसार भले ही वर-वधू के अन्य गुण मिल रहे हों, लेकिन अगर Nadi Dosh उत्पन्न हो रहा है तो इसे किसी भी हाल में नकारा नहीं जा सकता क्योंकि यह वैवाहिक जीवन के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होता है। ऐसे रिश्ते या तो नर्क समान गुजरते हैं या बेहद दुखद हालातों में टूट जाते हैं, यहां तक कि जोड़े में किसी एक की मृत्यु भी हो सकती है।

Vedic Astrology के अनुसार ब्रह्मांड में कुल 27 Nakshatr माने गए हैं, और इन 27 नक्षत्रों को 3 नाड़ियों में बांटा गया है - आदि, मध्य तथा अंत्य।

Kundli Milan करते हुए अगर वर-वधू दोनों ही आदि-आदि, मध्य-मध्य अथवा अंत्य-अंत्य में आएं, तो उनके साथ को नाड़ी दोष युक्त माना जाता है। इस तरह नाड़ीकूट के अंतर्गत उन्हें कोई पॉइंट भी नहीं मिलता। इसी तरह अगर इस मिलान में वर-वधू अलग-अलग नक्षत्र के हों, तो उन्हें पूरे 8 पॉइंट्स मिलते हंं और उन्हें नाड़ी दोष से मुक्त माना जाता है।

भकूट दोष 

Bhakut इससे यह पता चलता है की लड़का और लड़की दोनों के बीच रिश्ते में खुशाली कैसे रहेगी. और यह आर्थिक सम्पत्ति, परिवार और दंपत्ति के बीच खुसी को निर्धारित करता है. यह लड़के की राशि से लड़की की राशि की दूरी को देखा जाता है. लड़के की राशि से लड़की की राशी तक गिन कर जो संख्या आती है उसे मिलान में प्रयुक्त किया जाता है |

Bhakut Milan में तीन प्रकार के दोष होते हैं. जैसे षडाष्टक दोष, नव-पंचम दोष और द्वि-द्वार्दश दोष होता है. इन तीनों ही Dosho का परिहार भिन्न - भिन्न प्रकार से हो जाता है.किसी Kundli में जिस राशि में चन्द्रमा स्थित होते हैं वही राशि कुंडली का भकूट कहलाती है।Bhakut Dosh का निर्णय वर वधू की Janam Kundliyo में चन्द्रमा की किसी राशि में उपस्थिति के कारण बन रहे संबंध के चलते किया जाता है। Bhakut Dosh की प्रचलित धारणा के अनुसार षड़-अष्टक Bhakut Dosh होने से वर-वधू में से एक की मृत्यु हो जाती है, नवम-पंचम Bhakut Dosh होने से दोनों को संतान पैदा करने में मुश्किल होती है, या फिर सतान होती ही नहीं तथा द्वादश-दो Bhakut Dosh होने से वर-वधू को दरिद्रता का सामना करना पड़ता है।

वर्ण  वर्ण इससे लड़का लड़की के अहंकार का मिलान होता है ये चार होते है ब्राह्मण , वैश्य क्षत्रिय और शूद्र दोनों की कुंडली में अगर य एक जैसे हो तो उनका वर्ण मिल रहा है।

वैश्य

Vaisya इससे ये देखते है की कौन किस पर हावी रहेगा ये पांच प्रकार के होते है-मानव, वनचर,जलचर,चतुष्पाद और जलचर कीट।

तारा - 

Tara इससे शादी के बाद पति पत्नी की हेल्थ को देखते है, जनम के समय किसकी Kundli  में कितने तार थे य उसके द्वारा मिलाया जाता है वैसे य नौ प्रकार के होते है-जनम,सम्पत,विपता,छेम , प्रत्यारी, साधक, वध,मित्र ,और अतिमित्र .

योनि - 

योनि इससे शादी के बाद लड़का लड़की के बाद कैसा सम्बन्ध रहेगा ये देखते है. इसके लिए लड़का लड़की की कुंडली के नटल चार्ट में नक्षत्र की गृह दशा देखी जाती है , अगर दोनों की कुंडली में समान नक्षत्र हो तो उनके बीच का सम्ब्न्ध बहुत अच्छा होता है.

गृह मैत्री - 

गृह मैत्री इससे पता चलता है की शादी के बाद लड़का लड़की दोनों के बीच प्राकृतिक व्यवहार, मानसिक गुण, संतान का सुख और आपसी स्नेह कैसा रहेगा।इसमें दोनों की कुंडली में चन्द्र राशि का परस्पर मिलान किया जाता है |

गण-

गण इससे ये देखते है की लड़का और लड़की दोनों के बीच स्वभाव और व्यवहार कैसा रहेगा।यह नक्षत्रों के आधार पर निर्धारित किये जाते हैं | गण तीन होते हैं देव गण मनुष्य गण और राक्षस गण | मनुष्य की राक्षस गण से शत्रुता है इसलिए अंक शून्य मिलाता है | मनुष्य को मनुष्य गण से, राक्षस को राक्षस गण से और देव गण को देव गण से पूर्ण ६ अंक मिलते हैं |

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manishakoli282@com Good Information.
Reply 2018-05-11 07:36:07.0
ritesh gupta Dob 06051985 mera koi kam thik se banta nahi aur hamesha kisina kishi se jagda ho jata hai
Reply 2018-05-10 17:10:59.0
Mirdula Gupta Dob 7 July 1960 time 11.50p.m place Agra. Please tell me about my marriage life.my husband.
Reply 2018-05-04 17:13:18.0
rachna jain career ke baare me jaanna chahate hai
Reply 2018-05-04 15:58:40.0
Kamleshcohan Good
Reply 2018-05-03 16:12:55.0

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