शनि देव के बारे में लोगो के मन में बहुत भय है हर कोई शनि के प्रकोप से बचना चाहता है लेकिन ये सब लोगो का जानना बहुत जरुरी है की शनि का प्रभाव हमेशा ही अशुभ नहीं होता। ये बात सब जानते है की इंसान को अपने कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है। वह कुछ भी कर ले पर वो बच नहीं सकता हां वो दान पुण्य करके अपने कष्टों को कम अवश्य क्र सकता है लेकिन उनसे पूरी तरह से बचना असंभव है। उनके कर्मो का साया उनकी आने वाली पीढ़ी पर भी पद सकता है। आपने देखा होगा की जो बहुत धनवान लोग होते है वो पूरी जिंदगी अपनी मजे में जीते है लेकिन जब वो बीमार होते है तो लम्बे समय के लिए बिस्तर पकड़ लेते है। जिस धन को कमाने में वो अपनी पूरी जिंदगी लगा देते है वही उसका इस्तेमाल नहीं कर पाते। यही है शनि के प्रभाव में आने के बाद उतार-चढ़ाव। तो आज का हमारा विषय शनि को ले कर है की शनि के हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ते है और कैसे हम कुछ उपाय करके अपने जीवन में खुशहाली ला सकते है।

शनि मकर व कुम्भ राशि का स्वामी है। कुंडली में यह दसवें व ग्यारहवें भावका स्वामी है। दसवां भाव पिता, रोजगार, कारोबार, मेहनत, मान सम्मान आदि से संबंधित है। शनि सब पर प्रभाव डालता है तथा कारक भी है। शनि सूर्य के चारों ओर चक्कर साढ़े 29 वर्षों में लगाता है। राशि चक्कर भी यह 29 वर्ष 40 दिन में पूरा करता है। शास्त्रों में इसे सूर्य पुत्र कहा जाता है।गोचर में भी जब शनि वक्री होता है तो अपना प्रभाव डालता है।शनि के वक्री होने पर नौकरी से निकाला जाना, रैंक कम हो जाना आदि होता है। शनि तुला राशि में उच्च का व तुला का स्वामी शुक्र है जो विलासिता व सुंदरता,प्रेम का प्रतीक है।

शनि की प्रतिकूल अवस्था हमारे पुरे दिन के कामो पर भी प्रभाव डालती है। निचे हमने कुछ लक्षण बताये है जिससे ये पता चल सकता है की कही शनि प्रतिकूल तो नहीं।

(1) यदि शरीर में हमेशा थकान व आलस भरा लगने लगे।

(2) नहाने-धोने से अरूचि होने लगे या नहाने का वक्त ही न मिले।

(3) नए कपड़े खरीदने या पहनने का मौका न मिले।

(4) नए कपड़े व जूते जल्दी-जल्दी फटने लगे।

(5) घर में तेल, राई, दाले फैलने लगे या नुकसान होने लगे।

(6) अलमारी हमेशा अव्यवस्थित होने लगे।

(7) भोजन से बिना कारण अरूचि होने लगें

(8) सिर व पिंडलियों में, कमर में दर्द बना रहे।

(9) परिवार में पिता से अनबन होने लगे।

(10) पढ़ने-लिखने से, लोगों से मिलने से उकताहट होने लगे, चिड़चिड़ाहट होने लगे।

(11) रोग - आंखों की नजर कमजोर होना, गठिया, गैस रोग, पेट दर्द, हड्डी, लकवा आदि शनि के अधीन आते हैं।

ये तो बात हुई शनि के प्रभाव की और उसके लक्षण की अब बात करते है की कैसे हम शनि का प्रभाव कम कर सकते है। 

जैसे की ये तो सबको पता है की शनि पाठ करने व शनि मंदिर में तेल, लोहा, साबुत मांह चढ़ाने से शनि का प्रभाव काम होता है और ये सही है अगर आप ये करते है तो शनि की का प्रभाव बेशक काम होता है लेकिन आज हम को कुछ और उपाए भी बताएंगे जिसे करके भी आप शनि का प्रभाव काम क्र सकते है जैसे शनिदेव भगवान शंकर के भक्त हैं, भगवान शंकर की जिनके ऊपर कृपा होती है उन्हें शनि हानि नहीं पहुंचाते अत: नियमित रूप से शिवलिंग की पूजा व अराधना करनी चाहिए। पीपल में सभी देवताओं का निवास कहा गया है इस हेतु पीपल को आर्घ देने अर्थात जल देने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। अनुराधा नक्षत्र में जिस दिन अमावस्या हो और शनिवार का दिन हो उस दिन आप तेल, तिल सहित विधि पूर्वक पीपल वृक्ष की पूजा करें तो शनि के कोप से आपको मुक्ति मिलती है।

शनि के कोप से बचने हेतु आप हनुमान जी की आराधाना कर सकते हैं, क्योंकि शास्त्रों में हनुमान जी को रूद्रावतार कहा गया है। आप साढ़े साते से मुक्ति हेतु शनिवार को बंदरों को केला व चना खिला सकते हैं। नाव के तले में लगी कील और काले घोड़े का नाल भी शनि की साढ़े साती के कुप्रभाव से आपको बचा सकता है अगर आप इनकी अंगूठी बनवाकर धारण करते हैं। लोहे से बने बर्तन, काला कपड़ा, सरसों का तेल, चमड़े के जूते, काला सुरमा, काले चने, काले तिल, उड़द की साबूत दाल ये तमाम चीज़ें शनि ग्रह से सम्बन्धित वस्तुएं हैं, शनिवार के दिन इन वस्तुओं का दान करने से एवं काले वस्त्र एवं काली वस्तुओं का उपयोग करने से शनि की प्रसन्नता प्राप्त होती है। 

 

 

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