व्यक्ति की सारी गतिविधियां ग्रह, Nakshatar और राशियों से प्रभावित होती हैं। किसी भी कार्य को होने में उस कार्य से संबंधित ग्रह का क्रियान्वित होना जरूरी होता है, तभी जाकर कोई कार्य संपन्न होता है।

जैसे व्यक्ति के जीवन की अन्य क्रियाएं-प्रतिक्रियाएं grah नक्षत्रों के आधार पर पूर्व से निर्धारित होती हैं, ठीक वैसे ही वैवाहिक पक्ष का निर्धारण भी ग्रह Nakshatr के आधार पूर्व से निर्धारित होता है।

शायद इसीलिए कहा है कि जोड़ियां ऊपर वाला बना कर भेजता है|

आज कल अधिकतर लोग Astrologer के पास  जाकर यही प्रश्न पूछते है की शादी का yog हैं? शादी कब होगी? किस वर्ष होगी? जीवन साथी कैसा होगा? गृहस्थजीवन कैसा रहेगा? क्या मनपसंद जीवनसाथी मिलेगा? आदि |

Vedic Astrology के आधार पर हम जान सकते हैं कि जातक का विवाह कब, कहां, किस उम्र में कैसे युवक या युवती से कितनी दूरी पर होगा। ससुराल कैसी होगी, लड़की या लड़के का स्वभाव नौकरी/व्यवसाय रूप-रंग वैवाहिक जीवन सास- ससुर साला जेठ देवर इत्यादि का पता लगाया जा सकता है।

लेकिन इसके लिए सबसे पहले ये जानना जरूरी है की Janam kundli में विवाह के योग है या नहीं अगर योग नहीं होंगे तो शादी होना असंभव है।

वैसे तो Janamkundli का सातवाँ घर शादी का माना जाता है |और शुक्र को विवाह का Kaarak Grah|

लेकिन विवाह के लिए सप्तम, दूसरा , ग्यारहवा और प्रथम भाव को भी देखते है. क्यूंकि -

  • Seventh House को विवाह, पत्नी,पति साझेदारी में कार्य इत्यादि का भाव माना जाता है। इसी भाव से विवाह तथा पति पत्नी के बीच कैसा सम्बन्ध रहेगा की जानकारी मिलती है। इस भाव को कलत्र भाव भी कहा जाता है। Seventh House से ही विवाह तथा विवाह के समय का निर्धारण किया जाता है।
  • दुसरा भाव परिवार का भाव होता है अतः जब भी शादी होती है तो परिवार में एक फॅमिली मेंबर की बढ़ोतरी होती है इसलिए यह भाव भी विवाह के लिए महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
  • ग्यारहवा भाव व्यक्ति की इच्छा पूर्ति का भाव होता है तथा यह भाव सप्तम से पंचम भाव है अतः यह भाव भी विवाह के लिए देखा जाता है।
  • प्रथम भाव – यह भाव कुंडली में सबसे महत्त्वपूर्ण भाव होता है इस भाव का प्रतिनिधि व्यक्ति स्वयं करता है । सभी प्रकार के सुख यथा शादी, नौकरी आदि का उपभोग जातक स्वयं ही करता है अतः प्रथम भाव का सम्बन्ध जिस जिस भाव से होगा व्यक्ति अपने जीवन में उस भाव से समबन्धित सुख वा दुःख की प्राप्ति जरूर करेगा। यदि प्रथम भाव का सम्बन्ध कलत्र भाव से है तो जातक को पत्नी सुख की प्राप्ति अवश्य होगी।

अतः विवाह के लिए इन सभी भावो को देखना जरूरी होता है |

Vedic Astrology के अनुसार किसी जातक का विवाह तब होता है जब उसकी kundli के अनुसार सप्तमेश की dasha या Antardasha , सातवे घर में स्थित ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा अथवा सातवे घर को देखने वाले ग्रहों दशा अन्तर्दशा आती है

हम देखते है की कभी कभी सुन्दर स्वस्थ्य ओर धनवान होने के बाद भी किसी किसी जातक अथवा जातिका का विवाह नहीं होता है तो इसका कारण है की उसका सप्तम भाव अथवा सप्तमेश बिगड़ा हुआ है.या उनके सप्तम भाव में कोई अशुभ गृह है |

जैसे की जन्मकुंडली में गुरु, शुक्र, बुध और चन्द्र ये चार शुभ ग्रह होते हैं |

और शनि, मंगल, राहू, केतु और सूर्य ये सब पाप या अशुभ ग्रह हैं |

kundli में पाप ग्रह शादी में देर करवाते हैं और शुभ ग्रह शादी जल्दी करवाते हैं.

जैसे की अगर आपकी कुंडली के सप्तम स्थान में बुद्ध है, तो शादी बहुत जल्दी होती है | यदि शुक्र हो तो भी शादी का yog जल्दी बनता है | यहाँ बैठा चन्द्र भी जल्दी शादी करवाता है |

सूर्य के सप्तम में होने से शादी में रुकावट और देरी होती है |और मंगल से Manglik Yog बनता है |जिसके कारण शादी में देर हो सकती है |

अपने देखा होगा की किसी किसी की शादी बहुत जल्द ही हो जाती है, जिनकी शादी जल्दी हो जाती है उनमे से अधिकतर व्यक्तियों की कुंडली में बुध और शुक्र एक साथ सप्तम स्थान में बैठे होते हैं | इससे केवल १६ से २३ वर्ष की उम्र में शादी हो जाती है |

यदि एक अशुभ ग्रह और एक पाप ग्रह सप्तम भाव में बैठा हो तो भी शादी तय जल्दी होगी परन्तु शादी होते होते २ वर्ष लग जाते हैं | जितने अधिक ग्रहों का असर सातवें घर पर होगा उतनी जल्दी शादी होगी |

अब बात है जीवनसाथी की - जीवनसाथी कैसा होगा..

आपका जीवनसाथी कैसा होगा का विचार मुख्य रूप से सप्तम भाव के स्वामी तथा उस भाव में स्थित ग्रह के आधार पर किया जाता है ।

Janam kundli में सप्तमेश चतुर्थ, पंचम, नवम अथवा दशम भाव में हाने पर जीवन साथी निश्चित ही अच्छे परिवार से सम्बन्ध रखने वाला होगा तथा सामान्यतः वैवाहिक जीवन भी सुख पूर्वक व्यतीत होता है।

  • यदि सप्तमेश उच्च होकर केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित है तो आपका जीवन साथी शिक्षित धनवान तथा मान सम्मान से युक्त होगा। जैसे की -
  • यदि चतुर्थ भाव के स्वामी केन्द्रभाव के स्वामी के साथ युति या दृष्टि सम्बन्ध बनता है तो जीवनसाथी व्यवसायी हो सकता है।
  • इसी प्रकार अगर सप्तमेश, दूसरे, पंचम, नवम, दशम या एकादश भाव में हो और सप्तमेश चन्द्र, बुध या शुक्र हो तो जीवनसाथी व्यापारी होगा।
  • यदि आपकी जन्म कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी दूसरे अथवा बारहवे भाव में है तो जीवनसाथी नौकरी करने वाला होगा।
  • यदि सप्तमेश तथा चतुर्थेश नवमांश में उच्च या स्वराशि में हो तथा एक दूसरे से युति या दृष्टि सम्बन्ध बना रहा हो तो जीवनसाथी नौकरी करने वाला, तथा उच्चपद पर कार्य करने वाला होता है।
  • यदि चतुर्थेश अथवा चतुर्थ भाव से शनि का सम्बन्ध बन रहा हो तो आपका जीवनसाथी नौकरी करने वाला होगा।
  • Kundli  में अगर राहु केतु सप्तम भाव में हो अथवा सप्तमेश षष्टम, अष्टम, द्वादश में हो साथ ही Navamasa कुण्डली में भी कमज़ोर हो तो जीवनसाथी समान्य नौकरी करने वाला होता है ।

Comments
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sanjay Sanjay dob 28/08/69 tob 11:15am Bikaner business shutdown divorce karza what is upay
Reply 2018-05-04 17:39:04.0
Rakesh kumar choudhary वर्तमान समय में job किस क्षेत्र मे अच्छा रहेगा।
Reply 2018-05-04 12:42:18.0
Harish Vats DOB7/11/1963 TOB:9.15PM POB-:DELHI . PLEASE CAN YOU TELL ME THE MARRIAGE OF THIS PERSON POSSIBLE (MALE)
Reply 2018-04-25 14:27:18.0

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