जब भी किसी व्यक्ति का जन्म होता है, तब सर्वप्रथम उसका Nakshatr Charan देखा जाता है, कि वह क्या है. क्यूंकि Nakshatr के आधार पर ही व्यक्ति की Janamkundli  की बहुत सी बाते निर्भर होती हैं. की कौन सा Nakshatr  है, Nakshatr का स्वामी कौन है, क्योंकि Nakshatr के स्वामी की ही Dasa से ही व्यक्ति का जीवन आगे बढ़ता है.

क्यूंकि जन्म के समय मौजूद ग्रहों की स्थिति और Nakshatro के आधार पर हमारी Kundli का निर्माण होता है और फिर यही Grah अपने-अपने स्वभाव के अनुरूप हमारे जीवन को चलाते हैं।

Nakshatr  संस्कृत भाषा का शब्द है,, जिसका अर्थ है- न क्षरति, न सरति इति नक्षत्र अर्थात् न हिलने वाला, न चलने वाला। जो स्थिर हो।

और यह दो शब्दों से मिल क्र बना है ‘नक्स’ और ‘शतर’। संस्कृत में ‘नक्स’ शब्द का अर्थ है ‘आकाश’ और ‘शतर’ शब्द का अर्थ है ‘क्षेत्र’ जो कि एक साथ आकाश का क्षेत्र दर्शाता है।

जब आकाश में चन्द्रमा  27.3 दिन में पृथ्वी की  परिक्रमा पूरी करता है। इस प्रकार  मासिक चक्र में जिन मुख्य सितारों के समूहों के बीच से चन्द्रमा गुजरता है, चन्द्रमा व सितारों के समूह के उसी संयोग को Nakshatr कहा जाता है।

वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों का विशेष महत्व है।आपके जन्म के समय चन्द्रमा जिस Nakshatr में स्थित होता है , वही आपका janam Nakshatr कहलाता है ।

ज्योतिषो  का मानना है की आपके सही janam Nakshatr पता होने के बाद आपके बारे में बिल्कुल सही भविष्यवाणी की जा सकती है। 

ज्योतिष में 27 Nakshatr है,जैसे की अश्विनी, मृगसर, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, रेवती आदि।

लेकिन आज हम बात क्र रहे है Kundli के इन 27 नक्षत्रो में कौन से Nakshatr  शुभ, अशुभ, मध्यम, Gandmool और पंचक है और इनमे आपको कौन से कार्य करने चाहिए. 

 

गंडमूल नक्षत्र - 

27 नक्षत्रों में से Ashvini , ज्येष्ठा, आश्लेषा, मघा, mool और रेवती, इन छ: नक्षत्रों को 'मूल संज्ञक' या 'Gandmool' कहा जाता है।कहते है की यदि गंडमूल नक्षत्र में  किसी व्यक्ति का जनम होता है तो उसके जन्म के 27 दिन के पश्चात जब यह Nakshatr दोबारा आता है तब इसकी शांति करवाई जाती है ताकि जन्मा हुआ व्यक्ति  माता- पिता और परिवार  के लिए अशुभ न हो |

शुभ नक्षत्र-

 Rohini, अश्विनी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, उत्तराभाद्रपद, उत्तराषाढा, उत्तरा फाल्गुनी, Revati, श्रवण, धनिष्ठा, पुनर्वसु, अनुराधा और Swati ये शुभ Nakshatr हैं !इन नक्षत्रो में आप जो भी कार्य करते है वे सभी कार्य सिद्ध होते हैं |

मध्यम नक्षत्र - 

पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढा, पूर्वाभाद्रपद, विशाखा, ज्येष्ठा, आर्द्रा, मूला और शतभिषा ये मध्यम Nakshatr हैं ! इन नक्षत्रो में आप साधारण कार्य सम्पन्न कर सकते हैं,विशेष कार्य नहीं |

अशुभ नक्षत्र - 

भरणी, कृत्तिका, मघा और Ashkesha ये अशुभ नक्षत्र हैं !इन नक्षत्रो में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित है | ये Nakshatr क्रूर एवं उग्र प्रकृति के कार्यों के लिए जैसे बिल्डिंग गिराना, कहीं आग लगाना, विस्फोटों का परीक्षण करना आदि के लिए ही शुभ होते हैं |

पंचक नक्षत्र - 

धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और Revati| ये पाँच Nkshtar पंचक नक्षत्र  हैं | इन पांच नक्षत्रो में  समस्त शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, यात्रा, गृहारंभ,घर की छत डालना, लकड़ी का संचय करना आदि कार्य नहीं करने चाहियें |

           ठीक इसी प्रकार  Vedic Jyotish  में हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं.जन्म के समय चन्द्रमाँ जिस नक्षत्र के जिस चरण में होता है जातक का वही नक्षत्र चरण अर्थात Nakshatr का पद माना जाता है. 

जैसे की अश्विनी नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र में सबसे प्रमुख और सबसे प्रथम Ashvini को माना गया है।इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति सामान्यतः सुन्दर ,चतुर, सौभाग्यशाली एवं स्वतंत्र विचारों वाले और आधुनिक सोच के लिए मित्रों में प्रसिद्ध होते हैं।और साथ ही में ये बहुत ऊर्जावान होने के सथ-साथ हमेशा सक्रिय रहते  है। इनकी महत्वाकांक्षाएं इन्हें संतुष्ट नहीं होने देतीं। ये लोग सभी से बहुत प्रेम करने वाले, हस्तक्षेप न  पसंद करने वाले, रहस्यमयी प्रकृत्ति के होते हैं। ये लोग अच्छे जीवनसाथी और एक आदर्श मित्र साबित होते हैं।

और अश्विनी नक्षत्र के चार Charan होते है. और हर चरण के आधार पर व्यक्ति के बारे में पता चलता है जैसे की अगर किसी व्यक्ति का जन्म 

  • अश्वनी नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ है तो उस व्यक्ति के पिता को कष्ट व भय रहता है. 
  • अश्वनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है तो उस व्यक्ति के परिवार सुख एवम ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. 
  •  अश्वनी नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है तो उस व्यक्ति को सरकार से लाभ एवम मंत्री पद की प्राप्ति होती है.
  • अश्वनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ है तो उस व्यक्ति के परिवार को राज सम्मान व उस व्यक्ति को ख्याति प्राप्त होती है. 

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Alpeshbhai darji My marriagelife and my carrier total disaster.....what can i do for this.
Reply 2018-06-09 08:54:16.0
Roshni modi I want too now why my work is not happening.my married life is so destab
Reply 2018-06-08 15:55:20.0
Kamleshcohan Good Information.
Reply 2018-05-11 07:33:48.0
Vipul.j.kothari nice
Reply 2018-05-04 17:04:06.0
rachna jain nice
Reply 2018-05-04 15:55:10.0

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