जन्म के समय व्यक्ति अपनी Kundli  में बहुत से योगों को लेकर पैदा होता है.यह Yog अच्छे भी हो सकते हैं, खराब भी हो सकते हैं, मिश्रित फल प्रदान करने वाले भी हो सकते हैं.

कई बार ऐसा होता है की आपके पास सभी कुछ होते हुए भी आप परेशान रहते है.
इसका क्या कारण हो सकता है? कई बार व्यक्ति को अपनी परेशानियों का कारण नहीं समझ आता तब वह Jyotish सलाह लेता है. तब उसे पता चलता है कि उसकी Kundli  में  Pitr-Dosh बन रहा है और इसी कारण वह परेशान है,

ज्योतिष गणना में Dosh को बहुत माना जाता है. कुछ दोष शुभ स्थिति बताते हैं तो कुछ अस्थिरता. जैसे सूर्य को ग्रहण लग जाने पर अंधकार फैल जाता है और चन्द्रमा को ग्रहण लगने पर चांदनी खो जाती है उसी प्रकार जीवन में बनता हुआ काम अचानक रूक जाता हो तो इसे Kundli  दोष का प्रभाव समझ सकते हैं.  

ऐसा ही एक दोष पितृ दोष है, Pitr Dosh Kundli  में एक ऎसा दोष है जो  सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को Pitr Dosh के नाम से जाना जाता है।

पितरों से अभिप्राय व्यक्ति के पूर्वजों से है .जो पित योनि को प्राप्त हो चुके है .ऎसे सभी पूर्वज जो आज हमारे मध्य नहीं, परन्तु मोहवश या असमय मृ्त्यु को प्राप्त होने के कारण, आज भी मृ्त्यु लोक में भटक रहे है .

अर्थात जिन्हें मोक्ष की प्राप्ति नहीं हुई है, उन सभी की शान्ति के लिये Pitr Dosh निवारण और उपाय किये जाते है .

ये पूर्वज स्वयं पीडित होने के कारण, तथा पितृ्योनि से मुक्त होना चाहते है, परन्तु जब आने वाली पीढी की ओर से उन्हें भूला दिया जाता है, तो Pitr Dosh उत्पन्न होता है .

Pitr Dosh की जाच के लिए कुंडली में सबसे पहले सूर्य की स्थिति को देखा जाता है 

क्यूंकि सूर्य का सम्बन्ध हमारे मान सम्मान, पिता और बुजुर्गो से होता है !

यदि Kundli  में सूर्य पीड़ित होगा तो Pitr Dosh अवश्य होगा !

इसके आलावा Kundli  में यदि नवम भाव, पंचम भाव, चतुर्थ भाव, और दशम भाव में  सूर्य तथा गुरु, राहू या शनि के द्वारा पीड़ित है, चाहे उनकी युक्ति हो या दृष्टि, पित्र दोष अवश्य होगा. 

क्यूंकि सूर्य आत्मा एव पिता का Kaarak Grah  है,पिता का विचार सूर्य से होता है, अतः सूर्य जब Rahu  की युति में हो तो ग्रहण Yog  बनता है,सूर्य का ग्रहण अतः पिता आत्मा का ग्रहण हुआ,सूर्य व चन्द्र अलग अलग या  दोनों ही Rahu की युति में हो तो Pitr Dosh होता है,Shani  सूर्य पुत्र है। यह सूर्य का नैसर्गिक शत्रु भी है,अतः शनि की सूर्य पर दर्ष्टि भी Pitr Dosh उत्पन करती है,

इसी Pitr Dosh से व्यक्ति  आदि व्याधि उपाधि तीनो प्रकार की पीड़ाओं से कष्ट उठाता है,उसके प्रत्येक कार्ये में अड़चन आती है.कोई भी कार्य सामान्य रूप से निर्विघ्न सम्पन्न नहीं होते है,दूसरे की दृष्टि में जातक सुखी दिखाई पड़ता है,परन्तु जातक अतिरिक्त रूप से दुखी होता है,

जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट उठाता है,कष्ट किस प्रकार के होते है इसका विचार व निर्णय सूर्य राहु की युति अथवा सूर्य शनि की दृष्टि सम्बन्ध या युति जिस भाव में हो उसी पर निर्भर करता है। 

और Pitr Dosh के कारण व्यक्ति को बहुत से कष्ट उठाने पड़ सकते हैं, जिनमें विवाह ना हो पाने की समस्या, विवाहित जीवन में कलह रहना, परीक्षा में बार-बार असफल होना, नशे का आदि हो जाना, नौकरी का ना लगना या छूट जाना, बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाना या फिर मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना, निर्णय ना ले पाना, अत्याधिक क्रोधी होना आदि ।

Comments
Comments
Anurag Bohat acha
Reply 2018-06-08 17:36:19.0
Baljeet singh rana nice article
Reply 2018-06-08 16:51:00.0
Seemachoudhury 6.6.85@12.35 am.@rewari haryana
Reply 2018-06-08 16:32:56.0
Sampurna nand mishra 10.3.60 time 7.55pmb/p Allahabad hai.health financial problems kaise thik hogi.
Reply 2018-06-08 16:14:15.0
Keval 28.4..1993 ......12.oo.oo.. noon .. botad gujrat
Reply 2018-06-08 15:47:46.0

Latest Post